Aashish Rajput

Founder

श्री आशीष राजपूत ने अपने रंगकर्म की यात्रा 1996 में बाल कलाकार के रूप में शुरू की थी। उसके बाद सन् 2000 में मुख्यधारा के रंगमंच से जुड़ाव हुआ। उनका यह जुड़ाव कई पड़ाव से होकर गुजरा स्वास्तिक रंगमंडल (मथुरा)बृजवासी रंगमंडल (मथुरा) संकेत रंग टोली (मथुरा) सांस्कृतिक सेवा संस्थान (लखनऊ) यायावर रंगमंडल (लखनऊ) संगीत नाटक अकादमी (लखनऊ) ईशान ग्रुप (इटावा) प्रयास कला संगम (लखनऊ) मंथन कला समिति (इलाहाबाद) इप्टा (आगरा) आवाज)कला मंच (आगरा) रंग लोक (आगरा) एकजुट थिएटर ग्रुप (मुंबई) गीत एवं नाटक प्रभाग (नई दिल्ली) आदि संस्थाओं के साथ काम करते हुए उन्होंने श्री वेद भारद्वाज, श्री संदीपन विमल कांत नागर जी, श्री मुकेश शर्मा, श्री एम गनी, श्री जगमोहन रावत जी, श्री जितेंद्र मित्तल जी, श्री चंद्र मोहन जी, श्रीमती शैलजा कपूर पाठक, श्री संजय सिंह श्रीमती नीतू पांडे श्री प्रवीण चंद्रा, श्रीमती चित्रा मोहन, श्री रतिनाथ योगेश्वर, श्री जितेंद्र रघुवंशी, श्री दिलीप रघुवंशी, श्री अरुण त्रिवेदी, श्री विजय शर्मा, श्री डिंपी मिश्रा, श्री मति नादिरा जहीर बब्बर, श्री रंजीत कपूर, श्री आत्मजीत सिंह, श्री मति साबिर हबीब, श्री जफर संजरी, श्री गुरु विश्वजीत ,श्री रॉबिन दा, श्री मोहन महर्षि जी, श्री रघुवीर यादव, श्री सीमा विश्वास, श्री राजीव मुद्गल,श्री विभा छिब्बर, श्री उषा भाऊ कर जी, श्री चित्रा मुद्गल जी, श्री आलोक चटर्जी जी, श्री गोविंद नामदेव, श्री पीयूष मिश्रा, श्री अनुपम श्याम, श्री राजेंद्र नाथ और श्री सुकेश सान्याल जी आदि रंगमंच के निर्देशकों का सानिध्य प्राप्त हुआ और अभिनय की बारीकियों को गुरुजनों से सीखा और इन सभी से खूब प्रेम और स्नेह पाया श्री आशीष राजपूत जी ने लगभग 37 पूर्ण कालीन नाटकों में अभिनय किया है जिसमें से उनके कुछ प्रमुख नाटक हैं गिरगिट, सैंया भए कोतवाल, रंग बदलती दुनिया, बगिया बांछाराम, श्रीमान जी, बचाव पक्ष का बचपन, बीवियों का मदरसा, सफर, पहला और आखरी, डेढ़ इंच ऊपर , जै बात तो है, तो सम पुरुष ना मोह सम नारी, जाति पूछो साधु की, बेगम का तकिया, सच जूता नमक, द जनपद किस, होली, बाप रे बाप, खूबसूरत बहू, भगबातज्जुकीयम्, आषाढ़ का 1 दिन ,दुलारी बाई और जिस लाहौर नहीं देख्या,यह नाटक उनके प्रमुख नाटक हैंl जिसमें किए गए अभिनय को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया और पसंद किया गया है। श्री आशीष राजपूत जी को भारतवर्ष के प्रसिद्ध और वरिष्ठ रंग कर्मियों का सानिध्य- आशीर्वाद और उनसे स्नेह-प्रेम प्राप्त हुआ। और इस समय भी उनकी यात्रा निरंतर जारी है।

NATRAJ ARTS MATHURA

नटराज ग्रुप ऑफ़ आर्ट्स ट्रस्ट मथुरा नटराज ग्रुप की शुरुआत कुछ बाल कलाकारों के द्वारा की गई सन 1996 में कुछ बालक और बालिकाओं ने मिलकर इस छोटे से समूह की नींव रखी जो कि अलग-अलग प्रतिभाओं के धनी थे फिर इस समूह में कई प्रकार की कलाएं विधाएं जुड़ती चली गई जैसे नाट्य गायन नृत्य संगीत चित्रकला संधि कला वादन लोकगीत लोकनृत्य कठपुतली रंगोली मेहंदी मुखौटा कला हस्तकला पुस्तक कला आदि और भी कई प्रकार की कलाएं और कलाकार इस समूह से जुड़ते चले गए जिससे यह समूह और प्रखर होता चला गया अभावों के बावजूद यह छोटा सा समूह निरंतर सक्रिय रहा नटराज ग्रुप समय-समय पर और भी कई सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर जनसंपर्क और जागरूकता के कार्यों को करता रहा है हमने सामाजिक मुद्दों को उठाया है और सामाजिक कुरीतियों और कई सामाजिक विषयों पर खुलकर बात की है समाज में जागरूकता अभियान चलाएं हैं सामाजिक जागरूकता फैलाई है |

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